Home India भारत हिंदू राष्ट्र है, इसके लिए संवैधानिक मंजूरी जरूरी नहीं’ — RSS प्रमुख मोहन भागवत

भारत हिंदू राष्ट्र है, इसके लिए संवैधानिक मंजूरी जरूरी नहीं’ — RSS प्रमुख मोहन भागवत

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

कोलकाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए कहा कि इसके लिए किसी संवैधानिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सत्य है। उन्होंने यह बयान रविवार को आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित ‘100 व्याख्यान माला’ कार्यक्रम में दिया।

मोहन भागवत ने कहा कि जैसे सूर्य पूर्व से उगता है और इसके लिए किसी संवैधानिक मान्यता की जरूरत नहीं होती, उसी तरह भारत का हिंदू राष्ट्र होना भी एक वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि जो भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और भारतीय संस्कृति का सम्मान करता है, वह इस राष्ट्र का हिस्सा है।

“जब तक भारतीय संस्कृति जीवित है, भारत हिंदू राष्ट्र रहेगा”

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जब तक देश की धरती पर एक भी व्यक्ति भारतीय पूर्वजों की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करता रहेगा, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघ की विचारधारा है और इसके लिए संविधान में किसी शब्द को जोड़ने या न जोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

संविधान संशोधन पर टिप्पणी

भागवत ने कहा कि यदि संसद भविष्य में संविधान में ‘हिंदू राष्ट्र’ शब्द जोड़ती है या नहीं जोड़ती, इससे संघ की सोच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द मूल रूप से संविधान की प्रस्तावना में शामिल नहीं था और इसे 1976 में 42वें संशोधन के जरिए जोड़ा गया था।

जाति व्यवस्था पर बयान

मोहन भागवत ने कहा कि जन्म आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है और इसे हिंदू संस्कृति से जोड़कर देखना गलत है।

“RSS मुस्लिम विरोधी नहीं”

आरएसएस पर लगने वाले आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भागवत ने कहा कि संघ कट्टर राष्ट्रवादी जरूर है, लेकिन मुस्लिम विरोधी नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन का काम पूरी तरह पारदर्शी है और कोई भी आकर इसे देख सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई यह मानता है कि आरएसएस मुस्लिम विरोधी है, तो वह खुद आकर देखे। अगर ऐसा कुछ दिखे तो अपनी राय बनाए रखें, और अगर न दिखे तो राय बदल लें।”

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