Home Rajasthan एमडीएम अस्पताल में नवजात बदलने का आरोप, डीएनए जांच से तय होगी असली पहचान

एमडीएम अस्पताल में नवजात बदलने का आरोप, डीएनए जांच से तय होगी असली पहचान

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

जोधपुर: एमडीएम अस्पताल के जनाना विंग में बुधवार को बड़ी लापरवाही सामने आई। एक सहायक कर्मी (बाईजी) ने डिलीवरी के बाद परिजन को लड़का होने की जानकारी दी और नेग के रूप में 500 रुपये भी ले लिए। लेकिन दो घंटे बाद अस्पताल स्टाफ ने बताया कि प्रसूता को लड़की हुई है। इसके बाद अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया।

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि मामला गंभीर है और पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है। मंडोर एफएसएल टीम ने दोनों नवजातों और दोनों माताओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। प्रबंधन ने जांच के लिए कमेटी भी गठित की है।

कैसे बढ़ा विवाद?

पीपाड़ सिटी निवासी राकेश नागौरी ने बताया कि मंगलवार देर रात पत्नी ममता को अस्पताल लाया गया था। बुधवार दोपहर डिलीवरी हुई और बाईजी ने लड़का होने की सूचना देकर नवजात उन्हें सौंप दिया। परिवार ने तुरंत फोटो–वीडियो रिश्तेदारों को भेज दिए।

दो घंटे बाद स्टाफ ने बताया कि यह बच्चा किसी अन्य प्रसूता का है और उनके यहां बेटी हुई है। परिजनों ने इसे धोखाधड़ी बताते हुए जोरदार विरोध किया।

अस्पताल प्रशासन और पुलिस की दखल

मामला बिगड़ता देख अधीक्षक और पुलिस मौके पर पहुंचे। परिजनों ने डीएनए जांच पर ही फैसला मंजूर किया, जिसके बाद दोनों नवजातों की पहचान वैज्ञानिक तरीके से तय की जा रही है।

पहले भी हो चुके ऐसे मामले

2011 में उम्मेद अस्पताल में भी नवजात बदले जाने को लेकर ऐसा ही विवाद हुआ था। उस समय जोधपुर में डीएनए टेस्ट की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए नमूने जयपुर भेजने पड़े थे और मामला कई दिनों तक अटका रहा था।

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