Home bikaner गोचर बचाने की मांग तेज: बीकानेर कलेक्ट्रेट पर संतों ने किया महायज्ञ–रुद्राभिषेक

गोचर बचाने की मांग तेज: बीकानेर कलेक्ट्रेट पर संतों ने किया महायज्ञ–रुद्राभिषेक

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

बीकानेर में मंगलवार को बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा 188 गांवों की गोचर भूमि के भू-उपयोग में बदलाव के प्रस्ताव के खिलाफ एक अनोखा विरोध देखने को मिला।
गोचर बचाओ आंदोलन समिति के आह्वान पर संत समाज, गौ-सेवकों और 151 वेदपाठी ब्राह्मणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर करीब सात घंटे तक महायज्ञ और रुद्राभिषेक किया। धार्मिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर गुंजायमान रहा। महिलाओं की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

पूर्व मंत्री BD Kalla का आरोप

बीडी कल्ला ने कहा कि

  • 40 हजार से अधिक आपत्तियों के बाद भी प्रशासन ने सुनवाई नहीं की

  • दान में मिली भूमि का अधिग्रहण किसी भी रूप में उचित नहीं

  • “गाय की भूमि का दूसरा उपयोग नहीं हो सकता, विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है”

संत सरजू दास महाराज की चेतावनी

धरने का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय संत सरजू दास महाराज ने कहा—
“यह आस्था का मुद्दा है। गाय के नाम पर वोट मांगने वाली ही पार्टी अब गोचर भूमि पर कब्ज़ा करना चाहती है। जरूरत पड़ी तो आत्मदाह जैसे कठोर कदम से भी पीछे नहीं हटेंगे।”


मुख्य आपत्तियाँ क्या हैं?

गोचर संघ के शिव गहलोत के अनुसार नए मास्टर प्लान में बीकानेर के 188 गांवों की पूरी गोचर भूमि को आवासीय और सार्वजनिक उपयोग के लिए दिखाया गया है।

मुख्य प्रभावित क्षेत्र:

  • शरह नथानिया – 27,205 बीघा

  • गंगाशहर – 6,800 बीघा

  • भीनासर – 5,200 बीघा

उन्होंने बताया कि

  • राजस्थान लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1956

  • राजस्थान टेनेंसी एक्ट, 1955

दोनों में गोचर भूमि के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध है।
शरह नथानिया गोचर को महाराजा करण सिंह (1676) और महाराजा गंगा सिंह (1909) ने विशेष रूप से गौवंश संरक्षण के लिए सुरक्षित किया था।

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