जयपुर में लेपर्ड का बढ़ता खतरा: चांदपोल और अचरोल में दो बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन, वन विभाग हाई अलर्ट पर
जयपुर: राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में इस महीने लगातार लेपर्ड की मौजूदगी से दहशत का माहौल बना हुआ है। गुरुवार देर रात जयपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग ने दो अहम रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए, जिनमें दोनों लेपर्ड को सुरक्षित ट्रैंकुलाइज कर जंगलों में छोड़ दिया गया। इससे स्थानीय निवासियों ने राहत महसूस की।
चांदपोल में दुकान के अंदर मिला लेपर्ड
गुरुवार रात सरोज सिनेमा के पास चांदपोल क्षेत्र में एक दुकान में लेपर्ड घुस गया। रात करीब 1 बजे तक चले ऑपरेशन में वन विभाग की टीम ने भीड़ और संकरी गलियों के बीच करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया। ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने किया। रेस्क्यू के बाद सब-एडल्ट लेपर्ड को झुंझुनू के खेतड़ी क्षेत्र में रिलीज किया गया।
दिन में भी हुआ एक बड़ा रेस्क्यू
डॉ. माथुर ने इसी दिन जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में एक और लेपर्ड को बचाकर रिकॉर्ड बनाया। अचरोल के रूंडल इलाके में 70 फीट गहरे सूखे कुएं में दो दिन से फंसे एक सब-एडल्ट नर लेपर्ड को क्रेन और पिंजरे की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। फिलहाल उसे नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है, जहां उसकी हालत बेहतर बताई जा रही है।
शहर में बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी चिंता
पिछले कुछ हफ्तों में जयपुर के कई इलाकों—विद्याधर नगर, शास्त्री नगर, नेहरू नगर और चांदपोल—में लेपर्ड का मूवमेंट दर्ज किया गया है। चांदपोल का लेपर्ड तीन दिनों से इन क्षेत्रों के बीच घूम रहा था। इससे पहले झालाना क्षेत्र से भटककर निकला लेपर्ड मंत्री सुरेश रावत के सिविल लाइंस स्थित बंगले तक पहुंच गया था। वहीं 16 नवंबर को आबादी वाले क्षेत्र में घुसे एक पैंथर को भीड़ ने पीट दिया था, जिसकी मौत हो गई थी।
हादसों में भी इजाफा
16 नवंबर को नाहरगढ़ अभयारण्य की गुर्जर घाटी में एक लेपर्ड मादा शावक की मौत हुई थी। ग्रामीणों पर उसे डंडों से पीटने का आरोप है। वहीं 26 नवंबर को जयपुर-दिल्ली हाईवे के कूथाडा क्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिला, जिसकी मौत वाहन की टक्कर से होने की आशंका है।
वन विभाग ने बढ़ाई पेट्रोलिंग
लगातार घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने रात में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और लोगों से अपील की है कि रात के समय सतर्क रहें और किसी भी मूवमेंट की तुरंत सूचना विभाग को दें। इसके लिए 9782062885, 9001360000 और 8095970001 नंबर जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञों ने बताए कारण
वन्यजीव विशेषज्ञ सूरज सोनी के अनुसार, लेपर्ड मूवमेंट बढ़ने का प्रमुख कारण प्रे बेस में कमी, टेरिटोरियल कॉन्फ्लिक्ट और निगरानी की कमी है। सब-एडल्ट लेपर्ड भोजन और पानी की तलाश में नए क्षेत्रों में भटक रहे हैं, जिससे टकराव की स्थितियां बढ़ रही हैं। हाल के तीन प्रमुख मामलों में तीनों लेपर्ड अलग-अलग रिजर्व क्षेत्रों—झालाना, नाहरगढ़ और बीड पापड़—से निकलकर आबादी में पहुंचे थे, जो परिस्थितियों की गंभीरता को दर्शाता है।