Home World वेनेजुएला के बाद 5 और देश अमेरिका के निशाने पर! कोलंबिया से ईरान तक के लिए ट्रंप के पास बहाने

वेनेजुएला के बाद 5 और देश अमेरिका के निशाने पर! कोलंबिया से ईरान तक के लिए ट्रंप के पास बहाने

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

US Attack on Venezuela: अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला किया है और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को उठाकर अपने यहां लेता आया है. दोनों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है. दुनिया भर के देश अमेरिका की कार्रवाई के तरीके की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इस बीच ट्रंप शांत नहीं बैठे हैं. ट्रंप ने पहले तो वेनेजुएला को धमकी दी है कि अगर देश की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज सही काम नहीं करती हैं तो उन्हें मादुरो से बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. वेनेजुएला पर फिर से अटैक किया जा सकता है. खास बात है कि ट्रंप की यह अटैक वाली धमकी केवल वेनेजुएला के लिए नहीं है. उन्होंने एक साथ कोलंबिया, क्यूबा, ईरान, ग्रीनलैंड (डेनमार्क का हिस्सा) और मैक्सिको को भी धमकी दी है. चलिए जानते हैं कि ट्रंप इन देशों पर अटैक की बात क्यों कर रहे हैं.

कोलंबिया

अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक प्लेन, एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा है कि कोलंबिया बीमार है और उसे अमेरिकी समर्थन की जरूरत है उन्होंने कहा, “कोलंबिया भी बहुत बीमार है. इसे एक बीमार आदमी चलाता है जो कोकीन बनाना और इसे अमेरिका को बेचना पसंद करता है. और वह बहुत लंबे समय तक ऐसा नहीं करेगा.” जब पत्रकारों ने इसपर पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिकी सेना अपने ऑपरेशन में कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो को निशाना बना सकती है, ट्रंप ने जवाब दिया, “मुझे आपकी बात अच्छी लग रही है (साउंड गुड टू मी).”

मैक्सिको

ट्रंप ने प्लेन में ही बताया कि उन्हें अपने पड़ोसी देश मैक्सिको के बारे में भी कुछ करना होगा. अमेरिका मैक्सिको पर ड्रग्स तस्करी करने और अवैध प्रवासियों को भेजने का आरोप लगाता है. ट्रंप ने यहां कहा, “आपको मेक्सिको के साथ कुछ करना होगा. मेक्सिको को अपनी हरकतें सुधारनी होगी और ड्रग्स की तस्करी से बेहतर ढंग से निपटना होगा.” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मेक्सिको को बार-बार अमेरिकी सेना की पेशकश की है लेकिन उस देश की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम “चिंतित हैं, वह थोड़ी डरी हुई हैं.”

क्यूबा

ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद एक और लैटिन अमेरिकी देश- क्यूबा पर निशाना साधते हुए अपना हमला जारी रखा. एयर फोर्स वन पर ट्रम्प ने दावा किया कि क्यूबा की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए, वेनेजुएला के समान ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होगी. वहां सरकार खुद गिर जाएगी. ट्रंप ने कहा, “ऐसा लगता है कि क्यूबा पतन के कगार पर है. मुझे नहीं पता कि वे कैसे टिके रहेंगे; उनकी कोई आय नहीं है. उन्हें अपनी सारी आय वेनेजुएला से, वेनेजुएला के तेल से प्राप्त होती है.”

बता दें कि क्यूबा और वेनेजुएला में बहुत करीबी संबंध हैं. जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया था, तब क्यूबा के सैनिक भी राष्ट्रपति मादुरो की सुरक्षा में तैनात थे. क्यूबा ने घोषणा की कि वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन में 32 क्यूबाई सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं. इस बात को ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कहा, “आप जानते हैं, कल बहुत सारे क्यूबा वाले भी मारे गए थे.”

ईरान

ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर वो अपने यहां चल रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करता है तो अमेरिका जोरदार जवाब देगा. एयर फोर्स वन में सवार ट्रंप ने यह टिप्पणी की. दरअसलर ईरान में प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरों पर पहले ही ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के मिसाइल हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं. जब इसपर ट्रंप से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ”हम इस पर गौर करेंगे… हम इसे बहुत करीब से देख रहे हैं.”

ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों द्वारा घातक बल के उपयोग को लेकर सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, “अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू कर देते हैं, तो मुझे लगता है कि उन्हें अमेरिका से बहुत बड़ी मार झेलनी पड़ेगी.”

ग्रीनलैंड

डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कहा है कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड की जरूरत है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती उपस्थिति के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है. ट्रंप ने कहा, “हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है… यह अभी बहुत रणनीतिक है. ग्रीनलैंड हर जगह रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है… हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है, और डेनमार्क ऐसा करने में सक्षम नहीं होगा.”

ट्रंप ने आगे दावा किया कि यूरोप इस विचार का समर्थन करता है. गौरतलब है कि ग्रीनलैंड में साल 1979 से व्यापक स्वशासन है, हालांकि रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है. इसीलिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त हिस्सा माना जाता है.

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