Home bikaner पीबीएम अस्पताल का मामला:बच्चा अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर रेजिडेंट डॉक्टर को पीटा, मरीज की फाइल भी ले गए

पीबीएम अस्पताल का मामला:बच्चा अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर रेजिडेंट डॉक्टर को पीटा, मरीज की फाइल भी ले गए

Editor pranjal

by rajasthan crimepress

पीबीएम अस्पताल का मामलाः बच्चा अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर रेजिडेंट डॉक्टर को पीटा, मरीज की फाइल भी ले गएीएम बच्चा अस्पताल में शुक्रवार देर रात एक बालिका को बेड नही ं मिलने की बात पर खूब हंगामा हुआ। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट की और मरीज के साथ उसकी मेडिकल फाइल भी ले गए। इस मुद्दे पर गुस्साए रेजिडेंट डॉक्टर्स एक बार हड़ताल पर जान े को तैयार हो गए थे। वरिष्ठ चिकित्सकों के समझान े पर माने। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने शनिवार को एसपी मेडिकल कॉलेज की अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रेखा आचार्य से आरोपियों के खिलाफ पुलिस थान े मे ं मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।

घटना शुक्रवार रात 11 बज े बाद की है। मुक्ता प्रसाद के चार लोग 13 साल की बच्ची को लेकर इमरजेंसी मे ं आए थे। ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर विकास ने बच्ची को देखा और भर्ती कर लिया। वार्ड मे ं सभी 40 बेड भरे हुए थे। ज्यादातर बेड पर दो-दो बच्चों को लिटा रखा था। परिजनों ने अलग बेड की मांग की, जिस पर डॉक्टर ने असमर्थता जाहिर कर दी। इस बात को लेकर गर्मा-गर्मी हो गई। परिजनो ं का कहना था कि जब बेड खाली ही नही ं है तो मरीज को भर्ती क्यों किया। डॉक्टर ने समझान े का प्रयासकिया तो बात मारपीट तक जा पहुंची।

एक महिला ने डॉक्टर पर हाथ उठा लिया। कॉलर पकड़ ली। दोनों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। वार्ड में भर्ती अन्य बीमार बच्चे और उनके परिजन दहशत में आ गए। स्टाफ के अन्य लोगों को आते देख बच्ची को लेकर चले गए। डॉक्टरों का कहना ह ै कि वे महिला रेजिडेंट डॉक्टर के हाथ से मरीज की मेडिकल फाइल भी छीन ले गए।

डॉक्टरों ने घटना की सूचना देर रात पुलिस चौकी पर दे दी। शनिवार सुबह अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रेखा आचार्य को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा के इंतजाम करने सहित आरोपियो ं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंन े एसपी ऑफिस मे ं भी ज्ञापन दिया है।

डॉक्टर-मरीज के बीच आए दिन विवाद, सुरक्षा की व्यवस्था नहीं

पीबीएम मे ं डॉक्टर और मरीज के परिजनो ं के बीच आए दिन विवाद होता है। बच्चा अस्पताल मे ं पहले भी ऐसी घटनाए ं हो चुकी हैं। कहने को कैंपस में 250 सुरक्षा गार्ड हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं के दौरान दूर खड़ े तमाशा देखते हैं। बच्चा अस्पताल में रात के समय चार गार्ड रहते हैं।

पुरुषो ं के अंदर जान े पर रोक है। केवल महिलाओं कोप्रवेश दिया जाता है। उसके बाद भी रात को बच्ची के साथ एक महिला के अलावा तीन पुरुषों को रोका नही ं गया। यह भी पता चला है कि बच्ची के परिजन भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का नाम बार-बार ले रहे थे।

“अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक है। ऐस े में परिजनों को संयम रखना चाहिए। बच्चा अस्पताल की घटना की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी।”

डॉ. संजीव बुरी, कार्यवाहक अधीक्षक, पीबीएम

“रेजिडेंट डॉक्टर्स पिटन े के लिए नही ं हैं। हम मरीज का इलाज करते हैं। अधीक्षक आरोपियो ं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं, वरना सामूहिक अवकाश जैस े कदम उठान े पड़ेंगे।”

– डॉ. सचिन देसाई, अध्यक्ष, आरडीए

बच्चा अस्पताल में रोज 800 मरीज आ रहे, सभी बेड फुल

बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी यानी वायरल के प्रकोप बढ़न े के कारण बच्चा अस्पताल के आउटडोर मे ं इन दिनों रोज करीब 800 मरीज आ रहे हैं। चार यूनिट हैं। हर यूनिट में 40 बेड हैं। सभी फुल रहते हैं। एक बेड पर दो-दो बच्चों को सुलाना पड़ रहा है। इसस े संक्रमण का खतरा बना रहता है। कार्यवाहक एचओडी डॉ. मुकेश बेनीवाल काकि इन दिनो ं मरीज ज्यादा आ रहे हैं। बच्ची के परिजनों को स्थिति बतान े के साथ ही रेजिडेंट ने कहा था कि एक बार बेड शेयर कर लें। इलाज शुरू होने के बाद दूसरी जगह शिफ्ट कर देंगे, लेकिन परिजन नही ं मान े और मारपीट पर उतारू हो गए। सीसीटीवी कैमरे देख े जा रहे हैं।

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