Home World चीन ने जमीन पर तैनात की 100 मिसाइल तो अमेरिका भी नहीं हुआ पीछे, ट्रंप की नेवी को मिला समुद्र का ‘परमाणु शैतान’

चीन ने जमीन पर तैनात की 100 मिसाइल तो अमेरिका भी नहीं हुआ पीछे, ट्रंप की नेवी को मिला समुद्र का ‘परमाणु शैतान’

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

USS Idaho Nuclear Submarine: अमेरिका ने अपनी नई परमाणु अटैक सबमरीन USS इडाहो को नेवी में शामिल किया है. यह कदम ऐसे समय आया है जब चीन ने 100 से ज्यादा ICBM मिसाइलें तैनात की हैं. USS इडाहो समुद्र के नीचे से अमेरिका की रणनीतिक बढ़त को मजबूत करती है और इंडो-पैसिफिक में चीन के लिए सीधा संदेश मानी जा रही है.

अमेरिका ने अपनी नौसेना को एक और बेहद घातक हथियार सौंप दिया है. वर्जीनिया क्लास की परमाणु पनडुब्बी यूएसएस इडाहो (USS Idaho) को आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नेवी के हवाले कर दिया गया है. इस घटना की जानकारी ऐसी समय में आई है जब हाल ही में खुलासा हुआ था कि चीन ने 100 से ज्यादा इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अपने मिसाइल साइलो में तैनात कर दी हैं. दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक टकराव अब नए स्तर पर पहुंच चुका है.
यूएसएस इडाहो एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अटैक सबमरीन है, जिसका मतलब है कि यह महीनों तक बिना सतह पर आए समुद्र के नीचे रह सकती है. इसे 15 दिसंबर को अमेरिकी शिपबिल्डर जनरल डायनेमिक्स इलेक्ट्रिक बोट ने नेवी को सौंपा. अब यह कुछ महीनों तक परीक्षण और समुद्री ट्रायल से गुजरेगी, जिसके बाद 2026 की शुरुआत में इसे पूरी तरह नेवी में कमीशन किया जाएगा. चीन लगातार अपनी नेवल पावर बढ़ा रहा है, इसे देखते हुए अमेरिका भी पीछे नहीं रह सकता. फायर पावर इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास 61 तो वहीं अमेरिका के पास 70 पनडुब्बी हैं.

यह सबमरीन इतनी खतरनाक क्यों है?

USS Idaho करीब 7,800 टन वजनी है और इसमें एक न्यूक्लियर रिएक्टर लगा है, जो इसे लगभग असीमित दूरी तक चलने की ताकत देता है. यह सबमरीन बेहद खामोश (स्टील्थ) है, यानी दुश्मन के रडार और सोनार इसे पकड़ नहीं पाते. इसमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, Mk-48 टॉरपीडो और स्पेशल फोर्स ऑपरेशन सपोर्ट की क्षमता है. जरूरत पड़ने पर यह दुश्मन के जहाज, पनडुब्बी या तटीय ठिकानों पर बिना चेतावनी हमला कर सकती है.

क्या इससे अमेरिका चीन को चेतावनी दे रहा है?

हाल ही में पेंटागन की रिपोर्ट में सामने आया कि चीन ने मंगोलिया सीमा के पास 100 से ज्यादा परमाणु मिसाइलें साइलो में लोड कर दी हैं. ये मिसाइलें अमेरिका और उसके सहयोगियों तक मार करने में सक्षम हैं. इसके जवाब में अमेरिका जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र के नीचे से दबाव बना रहा है. USS Idaho जैसी अटैक सबमरीन चीन के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, क्योंकि इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है और ये पहले वार (First Strike) की क्षमता रखती हैं. यानी चीन अगर परमाणु ताकत दिखा रहा है, तो अमेरिका उसे यह बता रहा है कि समुद्र के नीचे उसकी पकड़ अब और मजबूत हो चुकी है.

इंडो-पैसिफिक में संदेश साफ

अमेरिकी नेवी पहले ही साफ कर चुकी है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र उसकी प्राथमिकता है. दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में ऐसी सबमरीन चीन की हर गतिविधि पर नजर रख सकती हैं. पुरानी लॉस एंजेलिस क्लास सबमरीन के रिटायर होने के बाद अब वर्जीनिया क्लास ही अमेरिका की अंडरसी ताकत की रीढ़ बन रही है. इस साल यह दूसरी पनडुब्बी है, जो अमेरिकी नेवी को मिली है.

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