मुंबई: भारतीय रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला और 22 पैसे की बढ़त के साथ 89.45 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। हाल के हफ्तों में रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने के बाद रुपये में यह रिकवरी जारी है।
इस महीने की शुरुआत में रुपया लगातार नए निचले स्तर पर फिसल गया था और एक समय यह 92 रुपये प्रति डॉलर के पार भी चला गया था। हालांकि अब इसमें सुधार के संकेत दिख रहे हैं, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का संभावित हस्तक्षेप माना जा रहा है।
शुक्रवार को रुपये में तेज उछाल देखने को मिला था और यह 53 पैसे मजबूत होकर 89.67 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
रुपये को सहारा देने वाले कारक
फॉरेक्स बाजार से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में आई इस मजबूती के पीछे कई अहम कारण हैं—
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कॉरपोरेट सेक्टर से मजबूत डॉलर इनफ्लो
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कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
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विदेशी निवेशकों की सकारात्मक गतिविधि
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,830.89 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे रुपये को अतिरिक्त समर्थन मिला।
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 12 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.689 अरब डॉलर बढ़कर 688.949 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भंडार 1.033 अरब डॉलर बढ़कर 687.26 अरब डॉलर रहा था।
SBI का अनुमान: आगे और मजबूत होगा रुपया
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में रुपये के लिए अगले वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में मजबूत रिकवरी का अनुमान जताया है। बैंक के मुताबिक, यह सुधार अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच देखने को मिल सकता है।
SBI ने कहा कि रुपये की मौजूदा कमजोरी संरचनात्मक नहीं है, बल्कि यह पहले भी देखे गए उतार-चढ़ाव के चक्र का हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, रुपया अतीत में भी गिरावट और मजबूती के कई दौर देख चुका है और मौजूदा गिरावट से भी उबरने की संभावना है।