Home Lifestyle अरावली बचाओ’ अभियान को देशभर में मिल रहा समर्थन, सैंड आर्ट के ज़रिए दिया गया संरक्षण का संदेश

अरावली बचाओ’ अभियान को देशभर में मिल रहा समर्थन, सैंड आर्ट के ज़रिए दिया गया संरक्षण का संदेश

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

पुष्कर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर चल रही ‘अरावली बचाओ’ मुहिम अब राजस्थान की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर लगातार आवाज़ उठाई जा रही है। इसी कड़ी में तीर्थनगरी पुष्कर के रेतीले धोरों पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहां सैंड आर्ट के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने करीब 100 टन से अधिक रेत का उपयोग कर विशाल कलाकृति तैयार की। इस सैंड आर्ट में अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की जीवनरेखा के रूप में दर्शाया गया। कलाकृति को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचे और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जुड़े।

जागरूकता के साथ सरकार तक संदेश

सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने बताया कि यह प्रस्तुति केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि अरावली में हो रहे लगातार क्षरण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने और सरकार तक चिंता पहुंचाने का एक शांतिपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि कलाकार समाज की आवाज़ बनकर ऐसे मुद्दों को रचनात्मक तरीके से सामने लाने का माध्यम बन सकता है।

नई परिभाषा को लेकर बढ़ा विरोध

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला की एक नई वैज्ञानिक परिभाषा प्रस्तावित की गई है, जिसके अनुसार केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली श्रेणी में माना जाएगा। इस प्रस्ताव का पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि यदि यह मानक लागू हुआ तो अरावली का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगा, जिससे खनन और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसका सीधा असर भूजल स्तर, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से ‘अरावली बचाओ’ अभियान लगातार तेज होता जा रहा है।

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