Home Uncategorized रूस-यूक्रेन युद्ध में बीकानेर के युवक की मौत, तीन माह बाद स्वदेश पहुंचा पार्थिव शरीर

रूस-यूक्रेन युद्ध में बीकानेर के युवक की मौत, तीन माह बाद स्वदेश पहुंचा पार्थिव शरीर

Editor Pranjal

by rajasthan crimepress

बीकानेर। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने बीकानेर जिले के लूणकरणसर क्षेत्र को गहरा सदमा दिया है। अर्जुनसर गांव निवासी अजय गोदारा की युद्ध क्षेत्र में मौत हो गई। करीब तीन महीने बाद बुधवार को अजय का पार्थिव शरीर दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया, जहां से परिजन उसे बीकानेर लेकर पहुंचे और अंतिम संस्कार किया गया। अजय के साथ उत्तराखंड के एक अन्य युवक का शव भी भारत लाया गया।

परिजनों ने बताया कि अजय गोदारा 28 नवंबर 2024 को पढ़ाई के उद्देश्य से स्टडी वीजा पर रूस गया था। वहां उसे एक महिला के जरिए रूसी सेना के कुकिंग विभाग में नौकरी और हर महीने लगभग दो लाख रुपये वेतन का झांसा दिया गया। इसी भरोसे पर अजय समेत कई युवकों को तैयार किया गया, लेकिन रूस पहुंचते ही उन्हें बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के सेना की वर्दी पहनाकर सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।

अजय ने 22 सितंबर को परिजनों से आखिरी बार बातचीत की थी। उसने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से बताया था कि उसे जबरन हथियार देकर युद्ध में भेजा जा रहा है। अजय ने यह भी कहा था कि यदि इसके बाद उसका संपर्क न हो, तो समझ लिया जाए कि उसके साथ कुछ अनहोनी हो चुकी है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया था।

वीडियो सामने आने के बाद परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई। परिजन केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मिलने दिल्ली पहुंचे और कई दिनों तक प्रयास करते रहे। बताया गया कि मंत्री मेघवाल ने विदेश मंत्री से भी इस संबंध में बातचीत की, लेकिन अजय को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।

10 दिसंबर को दूतावास के माध्यम से अजय की मौत की सूचना मिली। इसके बाद से ही परिवार दिल्ली में ही मौजूद था। बुधवार को जब शव भारत पहुंचा तो परिजन उसे गांव लेकर आए। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अजय की मौत किस तारीख और किन हालात में हुई। परिजनों का कहना है कि शव की स्थिति बेहद खराब थी और उन्हें उसे ठीक से देखने की अनुमति भी नहीं दी गई।

गांव के लोगों के अनुसार अजय पढ़ाई के लिए विदेश गया था, लेकिन कथित रूप से उसे युद्ध में झोंक दिया गया। उसकी मौत से पूरे अर्जुनसर गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। यह घटना विदेशों में पढ़ाई और नौकरी के नाम पर युवाओं को फंसाने वाले गिरोहों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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