जोधपुर: मारवाड़ की धरती पर इस प्रवासी मौसम में एक नया और उत्साहजनक नज़ारा देखने को मिला है। इस बार जोधपुर और आसपास के जलभराव क्षेत्रों में पहली बार कॉमन क्रेन के झुंड बड़ी संख्या में दिखाई दिए हैं। आमतौर पर यहां डेमोइजेल क्रेन (कुरजां) का आगमन होता रहा है, लेकिन इस सीजन में उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम रही, वहीं कॉमन क्रेन की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है।
जेएनवीयू के वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड कंजर्वेशन सेंटर के निदेशक डॉ. हेमसिंह गहलोत के अनुसार, किसी नए क्षेत्र में किसी प्रजाति का ठहरना भविष्य में उसके नियमित या स्थायी आवास बनने का संकेत होता है। इससे जैव विविधता बढ़ती है और पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ये प्रवासी पक्षी यूरेशिया के ठंडे इलाकों से सर्दियों में गर्म और सुरक्षित क्षेत्रों की ओर आते हैं। मारवाड़ का मौसम, भोजन और जलस्रोत उनके लिए अनुकूल साबित होते हैं। जोधपुर के गुड़ा विश्नोइयां, खेजड़ली, शिकारगढ़ और आसपास के तालाबों में इन पक्षियों की मौजूदगी देखी गई है।
वहीं, फलोदी के पास खींचन गांव में कुरजां की रौनक पहले की तरह बरकरार है, जहां हजारों डेमोइजेल क्रेन हर साल आती हैं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉमन क्रेन ने जोधपुर को नियमित ठिकाना बना लिया, तो इससे बर्ड वॉचिंग, इको-टूरिज्म और वन्यजीव फोटोग्राफी को नया आयाम मिलेगा और क्षेत्र के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।